क्या सीबीआई पर लगे दाग धो पायेगी सरकार?

मनोज टिबड़ेवाल आकाश / October 26, 2018
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नई दिल्ली: सीबीआई के दो बड़े अफ़सरों की घूसखोरी और आपसी लड़ाई ने देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी की साख पर ज़बरदस्त बट्टा लगाया है। बड़ा सवाल यह है कि.. क्या सीबीआई के दामन पर जो बदनुमा दाग लगे हैं.. उसे मोदी सरकार धो पायेगी?

क्या ये ठीक नहीं होता कि दाग़ी छवि के आईपीएस अफ़सरों को केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार सीबीआई में नंबर 1 और नंबर 2 की कुर्सी पर नियुक्त ही नहीं करती? इससे भी गंभीर सवाल यदि नियुक्ति हो ही गयी तो फिर घूसखोरी कांड उजागर होने के तत्काल बाद सरकार हरकत में क्यों नही आयी? क्यों पानी सिर से ऊपर जाने के बाद रात के अंधेरे में इन अफसरों को छुट्टी पर भेजा गया?

ये ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब देना सरकार के नुमाइंदों को मुश्किल पड़ रहा है। मामला अब सरकारी दहलीज पार कर सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है, अगर यहां भी सरकार की फजीहत हुई तो फिर क्या मुंह दिखायेगी सरकार? जिस तरह से सीवीसी की सिफारिश को आधार बना सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को रात के अंधेरे में हटाया गया है, इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी है।

हटाने के तरीके और अंतरिम निदेशक की नियुक्ति पर सवाल
तर्क दिया जा रहा है कि सीबीआई निदेशक की नियुक्ति करने का अधिकार ही जब पीएम, नेता विपक्ष और देश के मुख्य न्यायाधीश की कमेटी को है तो फिर उन्हें अचानक सीवीसी की रिपोर्ट पर अकेले कैसे पीएम हटा सकते हैं? और हटाने के बाद भी अंतरिम ही सही कैसे.. पीएम नया निदेशक अकेले नियुक्त कर सकते हैं? अब यह मामला तो कोर्ट के पाले में है.. वहीं से निर्णय होगा.. सरकार ने रात के अंधेरे में जो किया वह.. सही है या गलत?

अंदरुनी झगड़े की कहानी
कहा जा रहा है कि बर्चस्व की जंग को लेकर निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना आमने-सामने आ गये। जिस आलोक को सरकार ने निदेशक बनाया वही बदली परिस्थितियों में उसके खिलाफ हो गयी। निदेशक बनने के बाद आलोक.. सरकार के एक वर्ग की आंखों की किरकिरी बन गये और दूसरी तरफ इनके सामने खड़े हो गये गुजरात काडर के आईपीएस और सीबीआई में नंबर 2 राकेश अस्थाना। अंदर की बात ये है कि अस्थाना सत्ता प्रतिष्ठान की आंखों के तारे हैं और इनके कान भरने पर.. जिन सत्ताधारियों ने आलोक पर भरोसा कर पहले दिल्ली पुलिस का कमिश्नर बनाया और बाद में सीबीआई की कमान सौंपी.. वही सत्ताधारियों की नजर में संदिग्ध हो गये।

सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न
इन सबके बीच सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि जिस घूसखोरी कांड को लेकर देश भर में सीबीआई की जगहंसाई हो रही है उसकी जद में आये दोनों अफसरों को महज छुट्टी पर भेजकर सारे मामले को रफा-दफा कर दिया जायेगा या फिर निष्पक्ष जाँच करायी जायेगी? क्या दोषी पाये जाने पर ये जेल की सलाखों के पीछे पहुंचेंगे? कुछ भी हो सबसे जरुरी ये है कि सीबीआई पर जो बदनुमा दाग लगे हैं..उसे सरकार हर हाल में धोये और इस जांच एजेंसी की साख को आम जनता की नजर में फिर से कायम करे अन्यथा इसके दुष्परिणाम काफी खतरनाक होंगे..


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