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लॉकडाउन: कब थमी हुई जिंदगी दोबारा वापस लौटेगी पटरी पर?

मनोज टिबड़ेवाल आकाश / April 11, 2020
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यह सच है कि एक तरफ जहां लॉकडाउन से कोरोना जैसी महामारी पर काबू पाया जा सकेगा तो वहीं पर यह मानने वालों की भी कमी नहीं है कि यदि जरुरत से ज्यादा लॉकडाउन खींचा तो निकट भविष्य में इसके दुष्परिणाम दूसरे रुप में देखने को मिलेंगे।

जब अमेरिका और इंग्लैंड जैसे बड़े देश कोरोना वायरस से बचने के लिए सम्पूर्ण लॉकडाउन कर सकते हैं तो क्या भारत के पास इसके अलावा कोई और विकल्प था? शायद नहीं, तभी बड़ी संख्या में भारत की जनता तमाम कठिनाईयों को सहते हुए भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस कदम का समर्थन कर रही है। इसमें कोई दो राय नहीं कि लॉकडाउन से कोरोना के संकट को काबू करने में मदद मिलेगी लेकिन ऐसे बहुत सारे लोग हैं देश में जिनका मानना है कि अमेरिका, इंग्लैंड, स्पेन आदि बड़े मुल्कों की परिस्थितियां भारत से काफी मायनों में अलग हैं, जिनका हमें ध्यान रखना होगा।

देशी भाषा में कहने का मतलब यह है कि एक ही डंडे से सबको नहीं हांका जा सकता है। आज हर कोई जानना चाहता है कि आखिर लॉकडाउन कब खुलेगा? कब थमी हुई जिंदगी दोबारा पटरी पर वापस लौटेगी?

लॉकडाउन के लंबा खींचने से भारत को आर्थिक संकट के अलावा सामाजिक रुप में इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। एक तरफ जहां देश में मंहगाई और कालाबाजारी का संकट विकराल होगा वहीं पर सबसे अधिक मार गरीब, मजदूरों, कामगारों आदि को भोगनी पड़ेगी। सामान्य दिनों में देश के किसी भी शहर का शायद ही कोई अस्पताल मरीजों से भरा न रहता हो। कैंसर, हार्ट, बीपी-शुगर जैसे गंभीर रोगों से ग्रस्त लोग अपनी सामान्य जांच के लिए चिकित्सीय सलाह नहीं ले पा रहे हैं। जिन्हें इमरजेंसी में बीमारी का इलाज कराना है, वे पुलिसिया सख्ती के मारे सड़क पर नहीं निकल पा रहे हैं।

अप्रैल, मई व जून महीने में होने वाले वैवाहिक कार्यक्रम स्थगित हो रहे हैं। व्यापारियों की कमर टूट रही है। विशेष तौर पर जिनकी दुकानों, उद्योग-धंधों की जगहें किराये पर हैं, उन्हें अपने प्रतिष्ठान बंद होते हुए भी किराये चुकाने पड़ेंगे। कहा जा रहा है अपने कर्मचारियों को दुकान-धंधे बंद होने पर भी सेलरी देनी चाहिये, सवाल यह है कि आखिर व्यापारी यह धन लाये तो कहां से लाये? क्या लॉकडाउन का दूसरा पहलू और ज्यादा खतरनाक नहीं है? यदि गरीबी, कंगाली की वजह से कुछ लोगों ने आत्महत्या जैसे दुखद कदम उठाये तो? क्या इस चिंताजनक पहलू पर विचार करने से बचा जा सकता है? जैसे ही लॉकडाउन का ऐलान हुआ, गरीब मजदूरों की तो जैसे शामत ही आ गयी। घर पहुंचने की कीमत कईयों को दुर्घटनाओं में अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

ऐसे में यह सोचना बेहद आवश्यक है कि लॉकडाउन को कितना लंबा खींचा जाये? हमारे सामने एक तरफ कुंआ है तो दूसरी तरफ खाई, इससे बहुत समझकर पार पाना होगा अन्यथा इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।


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6 thoughts on “लॉकडाउन: कब थमी हुई जिंदगी दोबारा वापस लौटेगी पटरी पर?

  1. In this situation, we should be fight together against corona.
    You are right sir, i am agree with you.

  2. ज्वलन्त मुद्दे पर शानदार और साहसिक लेखन, पैने लेकिन वाजिब सवाल भी👍👍💐💐

  3. ज्वलन्त मुद्दे पर शानदार और साहसिक लेखन, पैने लेकिन वाजिब सवाल भी👍👍💐💐

  4. Sir aapne bhot hi jiwant mudde per apni Rai rakhi hai…Mai aapse sehmat hu…is Lock down ke khtam hone ke baad ke parinaam bhot bhyawah ho sakte hai…

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