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क्या यूपी की बेलगाम नौकरशाही पर मुख्यमंत्री कस पायेंगे शिकंजा?

मनोज टिबड़ेवाल आकाश / July 18, 2020
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जब देखना इतना भयावह है तो जरा कल्पना कीजिये आग का दर्द कितना भयावह होगा? गरीब फरियादियों, पीड़ित महिलाओं को जिलों में तैनात डीएम और एसपी उचित न्याय तक नहीं दे रहे। हमारे भ्रष्ट सिस्टम से पीड़ित गरीब जनता आजिज आकर अपने शरीर को आग लगा ले रही है। सोचिये जरा, उस पीड़ित के शरीर, मन और आत्मा पर क्या बीती होगी, जिसने अपने शरीर को आग के हवाले कर दिया हो?
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर से आये वीडियो ने रोंगटे खड़े कर दिये। अति सुरक्षित और बेहद संवेदनशील माने जाने वाले लखनऊ के लोकभवन के बाहर अमेठी से आय़ी दो गरीब महिलाओं ने अपने शरीर पर मिट्टी का तेल छिड़कर आग लगा ली।

सोफिया और गुड़िया नाम की महिलाएं मां-बेटी हैं। अमेठी जिले के जामो थाना क्षेत्र की रहने वाली मां-बेटी को नाली के विवाद में गांव के दबंगों ने लाठी-डंडे से जमकर पीटा था। सारा मामला स्थानीय पुलिस के संज्ञान में था, फिर भी दबंगो को हौसला इतना बुलंद कि पहुंच गये मां-बेटी को सबक सिखाने।
पुलिस और प्रशासन खाना-पूर्ति से आजिज मां-बेटी को जिले स्तर पर डीएम-एसपी से कोई न्याय नहीं मिला तो पहुंच गयीं लखनऊ अपनी इह-लीला समाप्त करने।
यह सवाल एक जिले का नहीं है, कमोबेश अधिकांश जिलों की यही स्थिति है। लापरवाह डीएम और एसपी मुख्यमंत्री के आदेशों को रद्दी की टोकरी में डाल रहे हैं और जमकर मनमानी कर रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभिन्न जिलों में तैनात मनबढ़ डीएम और एसपी की करतूतों पर कोई लगाम लग पायेगी?


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